धनपत राय श्रीवास्तव, मुंशी प्रेमचंद नाम से जाने जाते हैं। मुंशी प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार और विचारक थे। इनकी कहानियां हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिन्दी पत्रिकाओं में लिखा। उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी किया। महाजनी सभ्यता उनका अंतिम निबन्ध, साहित्य का उद्देश्य अन्तिम व्याख्यान, कफन अन्तिम कहानी, गोदान अन्तिम पूर्ण उपन्यास तथा मंगलसूत्र अन्तिम अपूर्ण उपन्यास माना जाता है।
Posted: 12 June, 06:22 by Triansh Hello in India News,
सारे नगर में महाशय यशोदानन्द का बखान हो रहा था। नगर ही में नही, समस्त प्रान्त मे...
Posted: 11 June, 06:27 by Triansh Hello in India News,
हमारा जिस्म पुराना है लेकिन इस में हमेशा नया ख़ून दौड़ता रहता है। इस नए ख़ून पर ज़ि...
Posted: 11 June, 04:04 by Triansh Hello in India News,
दोनों मित्र आश्रम की सैर करने चले। अमृतराय ने नदी के किनारे असी-संगम के निकट पचा...
Posted: 10 June, 11:02 by Triansh Hello in India News,
दाननाथ जब अमृतराय के बंगले के पास पहुँचे, तो सहसा उनके कदम रुक गए, हाते के अंदर ...
Posted: 08 June, 06:43 by Triansh Hello in India News,
दाननाथ यहाँ से चले, तो उनके जी में ऐसा आ रहा था कि इसी वक्त घर-बार छोड़ कर कहीं ...
Posted: 07 June, 04:14 by Triansh Hello in India News,
बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते...
Posted: 02 June, 04:16 by Triansh Hello in India News,
पूर्णा क्यों उदास थी, वह इसे कमलाप्रसाद से न कह सकी। उसे इस समय वसंत कुमार की या...
Posted: 21 May, 04:10 by Triansh Hello in India News,
पूर्णा कितना ही चाहती थी कि कमलाप्रसाद की ओर से अपना मन हटा ले, पर यह शंका उसके ...